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पिछले हफ्ते 11,588 करोड़ रुपए जुटाकर यूनिकॉर्न बनीं छह स्टार्टअप, इस साल 50 से ज्यादा इंडियन स्टार्टअप बन सकती हैं यूनिकॉर्न

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पिछले हफ्ते छह इंडियन स्टार्टअप ने रिकॉर्ड कुल 1.55 अरब डॉलर यानी लगभग 11,588 करोड़ रुपए जुटाए। ये स्टार्टअप इस निवेश से यूनिकॉर्न की जमात में शामिल हो गईं। एक अरब डॉलर से ज्यादा वैल्यू वाली प्राइवेट स्टार्टअप यूनिकॉर्न कहलाती हैं।

पिछले साल देश में 12 ऐसी स्टार्टअप शुरू हुईं, जो अपना नाम यूनिकॉर्न की लिस्ट में दर्ज करा चुकी हैं और इस साल 10 स्टार्टअप यूनिकॉर्न बन भी चुकी हैं। इंडस्ट्री बॉडी नैसकॉम और टेक्नोलॉजी कंसल्टेंसी जिनोव की संयुक्त रिपोर्ट के मुताबिक, इंडिया में इस साल 50 से ज्यादा स्टार्टअप यूनिकॉर्न बन सकती हैं।

पिछले हफ्ते जिन स्टार्टअप्स ने छह निवेश के लिए डील कीं, वे अलग अलग अलग-अलग सेक्टरों की थीं। उनमें हेल्थकेयर (फार्मेसी), सोशल कॉमर्स (मीशो), फिनटेक (ग्रो और क्रेड) के अलावा सोशल और कंटेंट प्लेटफॉर्म गपशप और शेयरचैट की पेरेंट कंपनी मोहल्ला टेक शामिल हैं।

सबसे ज्यादा इंडियन स्टार्टअप (छह में से चार) में पैसा न्यूयॉर्क के फंड टाइगर ग्लोबल ने लगाया है। यह शेयरचैट के 50.2 करोड़ डॉलर और ग्रो के 8.3 करोड़ डॉलर के हालिया इनवेस्टमेंट राउंड में लीड इनवेस्टर रहा। टाइगर ग्लोबल ने गपशप में 10 करोड़ डॉलर लगाए।

इंडिया कोशंट के फाउंडिंग पार्टनर आनंद लूनिया टाइगर को नया सॉफ्टबैंक बता रहे हैं। स्टार्टअप के अर्ली स्टेज में पैसा लगाने वाले इस फंड का निवेश लेंडिंगकार्ट, शुगर कॉस्मेटिक्स और शेयरचैट में है।सॉफ्टबैंक के विजन फंड 2 ने सोशल प्लेटफॉर्म मीशू में 30 करोड़ डॉलर लगाए हैं।

मीशू के फाउंडर और CEO विदित आत्रे बताते हैं कि शुरुआती वर्षों में उनको कई बार इनकार सुनना पड़ा। आत्रे का कहना है कि यह इसलिए हुआ क्योंकि कि उनकी स्टार्टअप देश में छोटे कारोबारियों के साथ काम कर रही है। स्टार्टअप का मकसद 10 करोड़ छोटे कारोबार को ऑनलाइन लाना है।

इंडस्ट्री को ट्रैक करने वाली फर्म वेंचर इंटेलीजेंस के मुताबिक इंडियन स्टार्टअप ने 3 से 9 अप्रैल के बीच निवेश के लिए कुल 21 डील कीं। उन कंपनियों ने उनसे 2.6 अरब डॉलर (19,400 करोड़ रुपए) जुटाए।

लूनिया कहते हैं कि बाजार में पूंजी बहुत सस्ती है। ऐसे में निवेशकों ने वैल्यूएशन के लिए कैश फ्लो शुरू होने के अनुमानित समय से आगे का सोचना शुरू कर दिया है। बढ़ते रेवेन्यू और कस्टमर वाली SaaS कंपनियां और दबदबे वाली कंज्यूमर कंपनियां पहले से ज्यादा वैल्यूएबल हो गई हैं।

टाइगर ग्लोबल के अलावा न्यूयॉर्क के दूसरे इनवेस्टर फाल्कन एज ने भी जमकर पैसा लगाया था। उसने स्विगी के 80 करोड़ डॉलर के इनवेस्टमेंट राउंड में अमांसा कैपिटल के साथ मिलकर निवेश किया है। निवेश 5 अरब डॉलर के वैल्यूएशन पर हुआ है। इससे स्विगी ने अपना रिजर्व बढ़ाया है जिससे उसको IPO लाने की दिशा में बढ़ रही कॉम्पिटिटर जोमाटो को जोरदार कॉम्पिटिशन देने में मदद मिलेगी।

फाल्कन एज फिनटेक स्टार्टअप क्रेड के 21.5 करोड़ के इनवेस्टमेंट राउंड में लीड इनवेस्टर रहा है। उसमें यह निवेश 2.2 अरब डॉलर के वैल्यूएशन पर हुआ है। इसके अलावा स्नैप, एयरबीएनबी और स्ट्राइप जैसी कंपनियों को शुरुआती सपोर्ट देने वाली जनरल कैटलिस्ट ने पुरानी कारें बेचने वाली स्पिनी पर दाव लगाया है। उसने OFB टेक के बिजनेस टू बिजनेस प्लेटफॉर्म ऑफबिजनेस में भी निवेश किया है।

देश में जनवरी से स्टार्टअप में रिकॉर्ड तोड़ निवेश हो रहा है। उनकी डील फटाफट हो रही हैं, उसका एवरेज साइज बढ़ा है। इसके अलावा कंपनियां प्लानिंग से ज्यादा फंड जुटा रही हैं। रिसर्च फर्म ट्रैक्शन के 8 अप्रैल तक के डेटा के मुताबिक स्टार्टअप ने 63 डील के जरिए औसतन 62.9 लाख डॉलर जुटाए हैं। यह उनकी तरफ से पिछले पांच साल में मार्च तिमाही में जुटाई गई सबसे ज्यादा रकम है।